हरियाणा में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अप्रैल का महीना एक बुरी खबर लेकर आया है। हरियाणा इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (HERC) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिजली के नए टैरिफ लागू कर दिए हैं। राज्य में बिजली की नई रेट 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएगी। इस बार बिजली की कीमतों में 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है, जिसका असर घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर दुकानदारों और उद्योगों तक सभी पर पड़ेगा। तीन साल बाद आए इस बदलाव ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि अब बिजली का बिल कैसे मैनेज किया जाए।
घरेलू बिजली के दाम में कितनी बढ़ोतरी?
नए टैरिफ के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को अब बिजली के लिए पहले से ज्यादा खर्च करना होगा। अगर आप हर महीने 50 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करते हैं, तो अब आपको 2 रुपये की जगह 2.20 रुपये प्रति यूनिट देने होंगे। वहीं, 51 से 100 यूनिट की खपत पर रेट 2.50 रुपये से बढ़कर 2.70 रुपये हो गया है। जो लोग 100 यूनिट से ज्यादा बिजली यूज करते हैं, उनके लिए 0-150 यूनिट की स्लैब में अब 2.95 रुपये प्रति यूनिट चुकाने होंगे, जो पहले 2.75 रुपये था।
इसके बाद 151-300 यूनिट तक 5.25 रुपये, 301-500 यूनिट तक 6.45 रुपये और 500 यूनिट से ऊपर 7.10 रुपये प्रति यूनिट का रेट तय किया गया है। खास बात यह है कि 300 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों से कोई फिक्स्ड चार्ज नहीं लिया जाएगा, जो छोटे परिवारों के लिए थोड़ी राहत की बात है।
कॉमर्शियल यूजर्स पर भी बढ़ा बोझ
दुकानदारों और छोटे व्यापारियों के लिए भी बिजली के रेट में इजाफा हुआ है। नए टैरिफ के मुताबिक, 0-50 यूनिट की खपत पर अब 2.20 रुपये प्रति यूनिट देने होंगे, जो पहले 2 रुपये थे। वहीं, 51-100 यूनिट की स्लैब में रेट 2.50 रुपये से बढ़कर 2.70 रुपये हो गया है। यानी अगर कोई दुकानदार 100 यूनिट बिजली यूज करता है, तो उसका बिल अब 20 रुपये ज्यादा आएगा। यह बढ़ोतरी छोटे कारोबारियों के लिए थोड़ी मुश्किल खड़ी कर सकती है। खासकर तब जब वे पहले ही बढ़ती लागत से जूझ रहे हों।
किसानों और इंडस्ट्री का क्या हाल?
कृषि क्षेत्र के लिए भी बिजली की कीमत में बदलाव किया गया है। पहले जहां किसानों को 6.48 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली मिलती थी, अब यह रेट बढ़कर 7.35 रुपये हो गया है। लेकिन सरकार की सब्सिडी की वजह से किसानों पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। सब्सिडी के बाद उन्हें अभी भी 10 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से ही भुगतान करना होगा। दूसरी तरफ, उद्योगों के लिए भी बिजली महंगी हुई है। हाई टेंशन (HT) सप्लाई में 30-35 पैसे और लो टेंशन (LT) सप्लाई में 10-15 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। यह बदलाव छोटे कारखानों से लेकर बड़े उद्योगों तक सभी को प्रभावित करेगा, जिससे प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ने की आशंका है।
दाम बढ़ने के पीछे क्या है वजह?
तीन साल बाद बिजली की कीमतों में यह बढ़ोतरी कई कारणों से हुई है। HERC के मुताबिक, ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई के चलते यह फैसला लेना पड़ा। कमीशन ने बिजली वितरण कंपनियों के राजस्व घाटे को कम करने की कोशिश की है, जो इस साल 4,520 करोड़ रुपये से घटकर 3,262 करोड़ रुपये पर लाया गया है। साथ ही बिजली की मांग बढ़ने और सप्लाई को बेहतर करने के लिए भी यह कदम उठाया गया।